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ईश्वर उसी में ठहरता है जो उसे संभाल पाता है।

ईश्वर उसी में ठहरता है जो उसे संभाल पाता है। ठीक जैसे प्रेम प्रेम पाना ईश्वर सा है पर संभालना ईश्वरीय सा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें