कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3033

भाषा / Language

सुख बहुतेरे हैं मेरे पास

सुख बहुतेरे हैं मेरे पास ... तुमको मैंने एक अगाध सा चुना तुम मेरे प्रिय दुःख रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें