भाषा / Language
गम से भीगे पन्नों से नाव बनाई है कभी
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गम से भीगे पन्नों से नाव बनाई है कभी ?
याद करो ...कभी कोई पतंग या फिरकी बनाई हो?
पीपनी तो पक्का बनी होगी ।
ओहहो ... कोई दूरबीन ?
जिल्द तो जरूर चढ़ाई होगी?
लिफ़ाफ़ा या कोई गुड़िया?
थोड़ा समय लो...
सोचो सोचो... कोई उपहार ही सजा दिया हो कभी?
कागज़ की बंदूक और मुखोटा तो इत्ता आसान है ...
बनाया क्या कभी?
गोल मोल कर गेंद तो जरूर मारी होगी?
कभी चिन्दी चिन्दी काट कर भरा है कोई गुब्बारा?
सोचो ...कोई तिकोना तीखा हवाईजहाज कभी कहीं अटकाया हो?
उफ्फ़ ...
कभी कोई कलम घिस कर या रंग से पकाया हो कोई सपना ...हाल फिलहाल?
सब छोड़ो...
कागज़ पर दिल बनाये हैं ? बहुत सारे ...
या कोई अक्षर पर उँगली फेरी हो लिखकर? बार बार...लगातार
"लव यू "लिखा हो बीते पिछले कुछ दिनों में ?
नहीं....?
सोच लो एक बार फिर...?
जाने दो...
तुम सयाने हो गए हो।
तुमसे न हो पायेगा ये ...बचपना।
😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें