भाषा / Language
जब हम खुश होते हैं तो उसका ही लेप खुद पर लगाते हैं जिसको अप…
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जब हम खुश होते हैं तो उसका ही लेप खुद पर लगाते हैं जिसको अपनी उदासी ,अपनी बेचैनी और अपने गुस्से में खुरच खुरच कर खुद से निकाल कर अलग करने की नाकाम कोशिशें करते हैं।
जिसके प्रेम में हो उसे उघाड़ना ओढ़ना सबसे आसान रहता है।
तुम से दूर कितना दूर होता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें