भाषा / Language
मृत्यु एक धागा भर टूटना है
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मृत्यु एक धागा भर टूटना है .....
जीवन का हथकरघा सतत है।
एक अधूरा पश्मीना हमेशा बनता रहता है।
*एक ही उदासी रोज़ जीना भी रोज़ रोज़ की मृत्यु है ।मेरा मृत्युदंड आँखों को मिला है।
शुभरात💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें