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मेरी तन्हाइयों में तुमने सुराख़ कर दिए हैं

मेरी तन्हाइयों में तुमने सुराख़ कर दिए हैं.... इससे ज्यादा मैं तुम्हारे शोर का हिस्सा क्या बनती शुक्रिया ...💐 ये सिखाने का कि दो गुलाब एक ही शाख पर दूर दूर भी सुंदर लगते हैं। इसे दूरियां नहीं नियति कहते हैं। *फूलों की बहार है यहां ...अभी बरखा की हल्की झमझम में भीगी तस्वीर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें