कल्पनाशब्दों के बीच
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यहां पहाड़ों में मेरे पास खूब सारे बादल खूब सारी धुँध है।

यहां पहाड़ों में मेरे पास खूब सारे बादल खूब सारी धुँध है। उदास होती हूँ तो इन को और पास बुला लेती हूँ ये मुझमें घुल जाते हैं कभी मैं इनको सोख लेती हूँ। उदासी cryptic पसंद है मुझे। *तस्वीरें बस अभी ली हैं....नज़ारे मन भटका देते हैं ।योगा करते करते तस्वीर लेने लग जाती हूँ।😊😊😊 मन लिखने लगता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें