मन के पत्थर भारी हैं... कुछ बादल बस अभी आकाश को उछाले हैं। एक भरम तो रखा रहे।
रचना 28809 जून 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishमन के पत्थर भारी हैं✦मन के पत्थर भारी हैं... कुछ बादल बस अभी आकाश को उछाले हैं। एक भरम तो रखा रहे।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें