कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम मेरे निजी पलों की सबसे छोटी सी प्रार्थना हो

तुम मेरे निजी पलों की सबसे छोटी सी प्रार्थना हो... अपने नाम भर की। अपनी पसंदीदा ग़ज़ल सुन रही और मुस्कुरा रही। बाल संवारने के मन नहीं था आज।खुद की तस्वीर खींचना और मिटा देना याद करने जैसा है। करती रहती हूँ।😊 पहाड़ मन साफ़ करते हैं पर यहां की धूप... यहां का पानी अपना रंग छोड़ देते हैं आप पर।रंग गहरा हो जाता है। थ्री शेड्स डार्क 😊 सुनिए...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें