कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2851

भाषा / Language

तुम्हारे आने से बहुत देर पहले से

तुम्हारे आने से बहुत देर पहले से और तुम्हारे जाने के बहुत देर बाद तक शब्द मौन रहते हैं। इस बीच ढेर सारी कल्पना होती है सुनो! जाते हुए अपनी पसंदीदा कविता ले जाना..... मुझसे उतारकर *तस्वीर तीन साल पहले कौसानी की है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें