भाषा / Language
असीम दुःख और अगाध प्रेम अक्सर एक ही नाम में लिखे मिल जाते ह…
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असीम दुःख और अगाध प्रेम अक्सर एक ही नाम में लिखे मिल जाते हैं ।
जैसे......
*तुम श्वेत - श्याम हो मेरे ....
न मेरे पूर्ण .....न रिक्त मेरे
न सोखते हो ....न अवशोषित ही करते
न मुझमें शून्य.... न अनन्त मेरा
न भीतर मेरे न बाह्य मेरा
जितना मुझ पर गिरते हो उतना परावर्तित होते हो।
तुम्हारा मुझमें कुछ भी नहीं ।
फिर भी मेरा रंग धनुष तुमसे है
शब्द अभी लिखे ....तस्वीर कल शाम विनोद ने ली है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें