भाषा / Language
हमने जानबूझ कर साँझा रंज उठाया
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*हमने जानबूझ कर साँझा रंज उठाया
पर इश्क़ अपना अपना रखा
हम हश्र से शुरू हुए लोग हैं।
*कागज़ पर ही मिलते हैं
कागज़ पर ही छूट जाते हैं
हम तुम
इसे सिलसिला कहूँ या कविता?
*उसके लिए लिखो कल्पना जो तुम्हें देख कर मुस्कुराता हो ...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें