कल्पनाशब्दों के बीच
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रात भर बरखा के बाद आज इधर मौसम रूमानी है। धुँध पल भर में पह…

रात भर बरखा के बाद आज इधर मौसम रूमानी है। धुँध पल भर में पहाड़ों के गले लग रही ।पल भर में रूठ कर चली जा रही ।पल भर में फिर पहाड़ों को लौट कर ढँक ले रही .... प्रेमिका सी। रूमान भरी पहाड़ी सुबह आप सबके लिए फूलों की भाषा.... रंगों का नेह शिफ़ा....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें