भाषा / Language
जब दुनिया छोटी हो रही होगी
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जब दुनिया छोटी हो रही होगी
मैं और तुम तब भी उसे प्रेम करते हुए उल्टी तरफ़ धकेल रहे होंगे .....
एक ऐसी हँसी को देखने के लिए।
ये यकीन मैं मृत्यु को जीते जी देना चाहती हूं।
*हम सभी अपनी चाहनाओं के मजदूर हैं। हमेशा रहें।
*May day* ... be my may be day always😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें