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देह से अलग देह से पार तुम मेरी अदृश्य ओट हो

देह से अलग देह से पार तुम मेरी अदृश्य ओट हो.... तुममें छिपा जा सकता है । एक ऐसी जगह जहां मैं व्याख्या नहीं संभावना में परिवर्तित हो जाती हूँ। अनंत से बस एक पायदान नीचे। एक साथ दो ध्रुव छूने -चुनने का सुख हो तुम स्व हो जाने का सुख
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें