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बेवजह

बेवजह ..... कभी सुई उत्तर को जाती है कभी दक्षिण को। एक रोज़ सुई अनायास उत्तरदक्षिण को तकती रह जाती है वहीं हृदय बिंध जाता है। ध्रुव तारा उग आता है। यही ताकती ठहरी दिशा प्रेम है। उस ओर से आने वाली हवा ,रोशनी और बारिश .... प्रेमी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें