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जब मन नीरस होने लगे और मन कुलबुलाहट से भर जाए तो कुछ नया कर…

जब मन नीरस होने लगे और मन कुलबुलाहट से भर जाए तो कुछ नया करना चाहिए । ऐसा कुछ जो आपका जी बांधे रखे। व्यस्त कर दे आपको कि खालीपन न घेरे। किताबों और गाने सुनने के अलावा कोई चारा मेरे पास है नहीं। दिन काटना मुश्किल हो जाता है कभी कभी। कल और आज कुछ वो किया जो कभी नहीं किया..... अनुदित करने का प्रयास।पहली बार।मुझे आता नहीं है पर मन को काम पर लगाने के लिए इससे अच्छा क्या होता। गलत भी हो सकती हूँ।टोक सकते हैं मुझे। आज आदरणीय नरेशजी की कविताओं पर प्रयास किया। कोशिश.... त्रुटियां लाज़िमी हैं। 😊😊😊😊 बाँवरी हूँ...झेलें
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें