कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2655

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जाने कैसा ख़्वाब देख रहे हैं

जाने कैसा ख़्वाब देख रहे हैं..... पास आये तो टूट जाता है दूर जाए तो रूठ जाता है 😊 *रंग...तुम तिल भर रोज़ गिरे एकसार मुझमें *रंग ...तुम जोगन सा राखे रखा रहने दे *रंग ...तुम पारदर्शी मेरा बाकी सबका मुझसे एक shade कम * रंग ...तुम मैं मेरा मुझसा मुझमें बस लिखा रहने वाला *रंग....तुम अचानक पड़ गयी बारिश न भीग पाई न भर पाई *रंग...तुम मुझमें खुले खुला रह जाए सूख जाए बस मेरे लिए *रंग ....तुम रहना तुम *रंग ..….तुम स्पर्श नहीं कूँची डूबे ... जिला दे *रंग ....तुम बस तुम क्यूँ न ये समझे रे तू *रंग ...तुम फीका सफ़ेद गर उदास तुम *रंग तुम... ज़िंदा पर आस मुझ में *रंग...तुम यात्रा भी और यात्री भी *रंग ...तुम मैं मेरी लय मेरी लीला के कैनवास *रंग....तुम धुंए धुँध सरीखा सफ़ेद पर सफ़ेद कल्पना भर *रंग ....तुम हर शिफ़ा चारागर मेरे रंग मुबारक💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें