कल्पनाशब्दों के बीच
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आओ बातें करें

आओ बातें करें.... फेसबुक एक चमचम दुनिया है।कोई कितना भी सादा हो ढिंचेक ही लगता है। यहां होने की सबकी अपनी अपनी वाज़िब गैर वाज़िब वजहें हैं। क्योंकि आप अपनी पसंद का सब कुछ चुन नहीं सकते तो हमने खुद को एक प्लेटफॉर्म दिया हुआ है कि लोग अपनी पसंद से हमें चुन सकें। पास न भी आ पाये पर एक sincerity या appreciation रख सकें। यहां ज्यादा तर connections mutual admiration पर टिके हैं ।उससे भी ज्यादा इकतरफा खिंचाव ,सम्मोहन,चाहना,स्नेह, नज़रिए और हुनर ने लोगों को बाँध रखा है। सबके पास बाँटने को है पर एक्चुअली कोई देना नहीं चाहता। ये एक ऐसा equation है जिसपर fb टिका है। हमेशा कहती हूँ ...आप सब से प्यार कर ही नहीं सकते। सब के साथ बह नहीं सकते। सबकी wall पर कैसे पहुँच सकोगे। बंटना थोड़े ही है.... चरणामृत की तरह सबको...इततु इततु ही सही। दिल कितना भी बड़ा हो ,अकेले में दिल के सबसे छोटे से कतरे में एक ही चेहरा उभरता है। कीजिये आँखें बंद ... कितने चेहरे याद आये? भूलना शुरू करें और पहुंचे उस कतरे तक । बस यही आपका है। मेरे इतने परिचित हैं यहां । आप सब के भी होंगे। ज्यादातर अजनबी। पास से गुज़रे एक दूसरे के तो इल्म भी न हो। आभास भी नहीं शायद। ये बात ज़हन में गांठ पड़ी हुई है मेरे। सबकी नहीं अपनी कहूंगी... मुझे अपने आसपास सादगी और शांत, हँसमुख और carefree माहौल चाहिए। मैं चतुर लोगों को बर्दाश्त नहीं कर पाती । मुझे सच में छुरी कांटा चलाना नहीं आता। समझते हैं न छुरी कांटा?😊 मेरी wavelength मैच नहीं हो पाती । दिन बोझिल हो जाए ऐसे मन नहीं इकट्ठे करती। हम सभी दिन भर में अलग अलग किरदार निभाते हैं। role playing टाइप्स। एक किरदार दूसरे से बेहद अलग।सबका अपना तय समय ...सबको तवज्जो देना पसंद है मुझे खुद में। चक्करघिन्नी हूँ। खुद में डूबी हुई अपनी ही दुनिया में।सब में थोड़ा थोड़ा पहुँच जाती हूँ जहां जाना चाहती हूँ खुशी से। खुद के characters को defined रखती हूँ। overlap नहीं करती😊 बस इस लिए मुतमईन रहती हूँ। Fb wall डायरी है। कई सालों से ऐसे ही भरती गई है। लोग क्या सोचते होंगे? क्या कहेंगे ? कभी सोचा ही नहीं। Unfollow unfriend कीजिये खुशी खुशी😊😊मुझे। मुझे पसंद है छोटी छोटी खुशियों को कह देना या उसको अंडरलाइन करके खुद में कुछ पल के लिए दर्ज़ करना। मैं तो हमेशा से ऐसे ही हूँ। खुश्बू रखती नहीं... दुःख दिखाती नहीं। मुस्कान देने के लिए बनी है ...सो बिखेरे रहती हूँ। Fb में मेरी कई महिला मित्र मुझसे इनबॉक्स में या फ़ोन पर जब ये कहती हैं कि आप क्या मस्त हैं। आपको डर नहीं लगता ? आप कितना fb पर एक्टिव हैं। कितनी खुश रहती हैं। आपकी वाल कितनी साफ सुथरी है। कितना भी प्रेम लिखो तस्वीर डालो आप बेख़ौफ़ रहती हो। आपके जैसे होना चाहिए। इसका बस एक ही मन्त्रा है । सबसे पहले तो fb पर पोस्ट डाल कर मैं भूल जाती हूँ। नीला टिक ,लाल दिल ,पीली हैरत सब अच्छा है पर मेरे सुकून को तय नहीं करता। उस पल क्या ख़्याल मुझे आरहा बस वो देखती हूँ। आप भी कर के देखिए। किसी को judge करने का या इफ़ेक्ट करने का अधिकार न दीजिए। न किसी प्रपंच में रहिये न दूसरों की बातें करिए। पहले रेखा और फिर परिधि खींच कर रखिये। आपकी सादगी और निर्मलता में इतनी कुव्वत हो कि आपको मैला करने से पहले कोई दो बार सोचे। Be stern Be beautiful for all. All मतलब all😊😊 ईश्वर और प्रेम के अलावा किसी को अपने मन की चाबी न दो। Search for souls. Keep unlearning.. And keep appreciating others Be very selfish for inner peace. Choose and keep going. Ignore..... और सब से जरुरी पारदर्शी रहें। सच कह दिया करें ...नींद आ जाती है। Social बस platform है ये आपको अपना एकांत खुद बचा कर रखना है। Love u all हमेशा.... *तस्वीरें आज स्कूल की है और ये मन अभी कार में लिखा है लौटते वक्त😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें