कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2601

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किसी की रूह को कैसे भी छुआ जा सकता है

*किसी की रूह को कैसे भी छुआ जा सकता है.... आप शुरुआत किताबों से कीजिये।💐 अधूरी चीजों का देवता... Geet ji को पढ़ना यानि एक ऐसा सुख जो लिखा नहीं जा सकता। किताब हाथ में आते ही लगता है एक पूरा शब्दकोश पकड़े बैठ गए हैं। हर पंक्ति इतनी सुगढ़ लगती है कि लगता है इसका यही प्रारूप आखरी होगा। आपका नाम गीत बिल्कुल सार्थक है । और कुछ आपको मैच नहीं करता। आपको बार बार सुना जा सकता है। किताब पढ़ते वक्त ये ख़्याल हर चैप्टर के बाद आता है कि लिखना कितना जिम्मेदारी का काम है और आप कितनी रिसर्च के बाद अपना मन कहते हैं। इस दौर के वे शानदार कवि और कथाकार हैं ।किताबों से सुकून पाने वालों को इन्हें पढ़ना ही होगा। आप जिस विश्वास और आस्था से अपनी बात रखते हैं वो दुर्लभ है। इस किताब में कारवी के फूल,जहाँ मन लगे,दिल के किस्से कहाँ नहीं होते,आप किसके लिए लिखते हैं मुझे बेहद खूबसूरत लगे। डायरी के फुटकर पन्ने अध्भुत हैं जिन्हें बार बार पढ़ सकती हूँ। आप सबके प्रिय रहें। आपकी शब्द साधना हमारे लिए ईश्वर के प्रसाद जैसा है जिसे बस माथे से लगाया जा सकता है। आपकी कई आने वाली किताबों का सदा इंतज़ार रहेगा। रुख पब्लिकेशन्स और अनुराग को एक बार फिर बधाई ।कवर पेज बेजोड़ है। आप अपने प्रयासों से मोती छाप रहे। शुभकामनाएं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें