कल्पनाशब्दों के बीच
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स्कूल में बच्चों की परीक्षा चल रही वो भी ऑनलाइन ... तो थोड़…

स्कूल में बच्चों की परीक्षा चल रही वो भी ऑनलाइन ... तो थोड़ी राहत है। दिन जल्दी शुरू हो जाता है मेरा तो काम भी जल्दी निपट जाता है। कहीं आना जाना नहीं रहता तो घर,पसंदीदा गाने ,किताबें ,मैं और ढ़ेर सारा वक़्त होता है। अभी सिरहाने में दो किताबें खरीदी हुई रखी हैं।आसपास किताबें हों तो एकांत मज़ेदार लगता है। लगता है कोई है साथ। बोलेगा नहीं तो सुन तो लेगा ही।😊😊😊 कविता की किताबें आसानी से पढ़ जाती हूँ पर कहानियां पढ़ने का धैर्य अभी भी सीखना है। सीख जाऊंगी ये भी एक दिन। फ़ोन पर किसी से बात करने का ज्यादा मन नहीं रखती तो किताबों से बोल लेती हूँ। जब कोई दोस्त याद आये तो उसे दस्तक दे देती हूँ।मुझे वो दोस्त पसंद आते हैं जो किताबों के करीब ले जाते हैं । पूरे शहर दिल्ली में जो किताबों की दुकान दिखाए और किताब पढ़वाए ऐसे दोस्त हमेशा पास रहें ।यही दुआ अभी मेरे सिरहाने के पास शिवानी जी की अपराजिता है और एक किताब तीन रोज़ इश्क़ है जिसे पूजा उपाध्याय ने लिखा है। मैं एक साथ दो किताबें बारी बारी पढ़ रहीं हूँ। इनको ऐसे ही पढ़ने का मन बन गया है। कहानियां सुंदर हैं। तुम मेरे पास रहते हो.....इल्ज़ाम किताबों पर लग जाता है। 😊😊😊😊 पढ़ कर लिखूंगी ...क्या मिला 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें