भाषा / Language
दो प्रेमिल लोगों के बीच कितने ही लोग आ जाएं......प्रेम ही ल…
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दो प्रेमिल लोगों के बीच कितने ही लोग आ जाएं......प्रेम ही लेकर लौटेंगे।
नदी खुद से निकलने वाली नदियों को जल से ही भरती है....मिट्टी से नहीं
तुम और मैं जल भरते रहेंगे...
हमसे होकर गुजरने वाले हर उस मन में जो ठहरेगा हमारे बीच एक पल भी।
*समंदर से मन कहा ..... नदी ने
समंदर मुझे सुनता रहा।
ठहराना ...रुकना नहीं होता ।
हाथ दे देना....रुकना होता है कल्पना😊
शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें