भाषा / Language
हर दरख़्त उदासी के फूलों से लदा हुआ है।
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*हर दरख़्त उदासी के फूलों से लदा हुआ है।
यहाँ कोई अपना मौसम किसी को नहीं बताता ।
सब कयास लगाते हैं
*सबका एक निज
एक निजी
और एक निजी ईश्वर होता है।
हम अपने आने जाने और जाने आने वाले रास्तों को खूब पहचानते हैं।
*लिखने ने मुझे कहना सिखाया ....
कहा हुआ लिख कर हर बार उदासी से सन गया।
*बाहर से भीतर और भीतर से और भीतर जाने वाले सारे रास्ते बंद हैं। सब में उदासी जम गई है।
निरी सफ़ेद
*उदासी का ठौर प्रेम ही है।खुरच कर देखो हृदयलिपि
उस पर तुम्हारा शहर मिलेगा।
और मेरी मौन पदचाप
*शुभरात
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें