ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2580

भाषा / Language

एक रोज़ मैं तुम्हें अपनी आत्मा के भीतर झांकने का मौका दूँगी

✦
एक रोज़ मैं तुम्हें अपनी आत्मा के भीतर झांकने का मौका दूँगी.... तुम सब कुछ देखना फिर मुझे चुनना मैं सौ अपराध और करूँगी तुम मुझे बचा ले जाना। 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें