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कल अनायास उसने मुझ पर एक मोरपंख धर दिया

कल अनायास उसने मुझ पर एक मोरपंख धर दिया.... अपनी हँसती तस्वीर भेज कर तुम्हारे साथ लुक्का छिप्पी खेलना बेकार काम है.... तुम दिखते रहते हो और धप्पा भी नहीं होते। तुम तीरंदाज ही सही हो मुस्कुरा कर वार वाले
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें