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सिरहाने पर ही मिल जाते हो

सिरहाने पर ही मिल जाते हो तुम्हारी रात बस मुझसे है क्या चाँद ? जो तुम न हो तो हम भी हम नहीं 😊 ये बस मैंने सुना है अभी चाँद ने कहा नहीं है पर कहेगा किसी रोज़ जानती हूँ मैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें