कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2531

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बात बनाऊँ भी तो क्या

बात बनाऊँ भी तो क्या.... तुम दिख जाते हो तो ही तो मुझमें कुछ बात होती है। गुम कल्पना कहाँ ढूंढे तुम्हें?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें