कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2521

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हर खूबसूरती कागज़ पर रखते ही "तुम " हो जाती है ।

हर खूबसूरती कागज़ पर रखते ही "तुम " हो जाती है । सज़दा झुक - कह कर ही नहीं .... किसी के इश्क़ में चुप रह कर भी किया जा सकता है। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें