कल्पनाशब्दों के बीच
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अकेला होना जरूरी है

अकेला होना जरूरी है.... उसे शौक था अकेलेपन को यूँ सँवारने का । वो इश्क़ में थी अपने एकांत से। अपने को बचाये रखने के लिए वो छुपा लेती थी खुद को जाने कहाँ कहाँ। अकेलापन गुलज़ार रहे उसका । वो सबसे ज्यादा जीती है वहां। ज़िन्दगी से भी ज्यादा। और बेहद खूबसूरत हो जाती है। यकीन मानिए निचले होंठ के ठीक नीचे beauty spot नहीं उसने अकेलापन ही इकट्ठा रख रखा है। कोई सुन सके ....तो सुने ..... उसका एकांत
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें