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रचना 2465

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जिस रास्ते सब पहुँचते हैं तुम तक मैं वो राह कभी नहीं चुनूँगी

जिस रास्ते सब पहुँचते हैं तुम तक मैं वो राह कभी नहीं चुनूँगी इंतज़ार में बैठ जाओ या खड़े रहो ....क्या फ़र्क़ है? 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें