कल्पनाशब्दों के बीच
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सिर्फ़ गले लग कर क्या होगा

सिर्फ़ गले लग कर क्या होगा? आँखें ख़ाली करनी है मन में गंगाजल छिड़कना है। उंगलियां के बीच लगा कोहरा हटाना है। होंठों पर प्रेम खुरच कर फिर प्रेम लिखना है। "सुनो " कहना है। कितने तो काम बाक़ी है इस छोटी सी मुलाकात में शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें