नए किनारे पर ढ़ेर सारी धूप रोकी है। पुराने सभी मोड़ अंधेरों में धकेल आई हूँ। आओ तुम्हें नई उम्मीद का निवाला खिलाऊँ.... चख कर देखो ....खुशी