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साल भर में 365 दिन थे... ज़िन्दगी कितनी भर रही होगी

साल भर में 365 दिन थे... ज़िन्दगी कितनी भर रही होगी? उतनी भर जितने पल मैं याद आई और मुझे तुम याद आये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें