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रचना 2415

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उसके चूमने से मेरी आत्मा सुर्ख रहती है

उसके चूमने से मेरी आत्मा सुर्ख रहती है.... ये अलग बात है कि हम आज तक बस कागज़ पर ही मिले हैं। तस्वीर से आवाज माँगना और आवाज़ में तस्वीर खोजना.... ये प्रेम में पड़ जाने की सज़ा है। भटको..... शुभकामनाएं शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें