भाषा / Language
खुल कर बता देते तो .......समेट लेती ये ख़ामोशी
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खुल कर बता देते तो .......समेट लेती ये ख़ामोशी
इन आँखों से..... शब्दों का इंतज़ार ढोया नहीं जाता
छलक जाती हैं चुप्पियां.......
शुभरात💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें