कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 2404

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खुल कर बता देते तो .......समेट लेती ये ख़ामोशी

खुल कर बता देते तो .......समेट लेती ये ख़ामोशी इन आँखों से..... शब्दों का इंतज़ार ढोया नहीं जाता छलक जाती हैं चुप्पियां....... शुभरात💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें