कल्पनाशब्दों के बीच
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कल के बादल आज फ़िदा हुए। झम झम बरसे।

कल के बादल आज फ़िदा हुए। झम झम बरसे। तुम कब फ़िदा होगे? अभी का नज़ारा😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें