भाषा / Language
जितनी चुप्पी से तुम घिर आते हो मुझ पर उतना तो कोई भी नहीं ठ…
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जितनी चुप्पी से तुम घिर आते हो मुझ पर उतना तो कोई भी नहीं ठहरता।
रुके रहना मुझ पर....
तस्वीर कल दोपहर की है जब तुम्हारे बरसने की आस थी और तुम टकटकी बाँधे तकते रहे.... बस मुस्कुराते रहे फिर ओझल हो गए।
सुनो....एक बात और....
तुमसे ज्यादा तुम्हारी तस्वीर बातूनी है।😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें