कल्पनाशब्दों के बीच
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सबके पास आँखें होती हैं

*सबके पास आँखें होती हैं... कुछ के पास दिल तुम मेरा कुछ हो... *जो चाहिए ले जाओ मुझसे .... बस एक रत्ती मुस्कान छोड़े जाना... मैं फिर बन जाऊँगी *कभी स्याही को पानी में घुलते हुए देखना..... मैं रोज़ वैसे ही एकसार होती हूँ तुममें घीरे - धीरे *धुँध हूँ .... होकर भी नहीं हूँ तुम्हारे पास।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें