कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2385

भाषा / Language

साँचा बना नहीं था प्रेम का कभी

साँचा बना नहीं था प्रेम का कभी..... शायद इस लिए अक्षर बने तुम्हारे मेरे लिए फिर प्रेम का आकार दिखने लगा पंक्तियों में .... पूर्ण विराम और अर्ध विराम के बीच कलमकार प्रेमी थोड़े ही होते हैं वो तो बस नक्काश होते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें