कल्पनाशब्दों के बीच
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कमाल

कमाल.... भरी बोतल ही नहीं ख़ाली बोतल भी कर देती है जादू। बस खुरापाती कल्पना होनी चाहिए।😊 सुबह जब इन बोतलों को साफ कर रही थी तो पिताजी बोले ये विलायती ब्रांड तो बहुत कमाल होती है। तुम क्या करने जा रही हो इसका?😊😊😊 मैंने कहा इसका ब्रांड हटाकर इसमें कुछ भर दूँगी। पिताजी बोले इन खाली बोतलों में कुछ भी भर लो वो वाला कमाल नहीं आएगा😊😊😊😊 अभी शाम को उनके कमरे में ये करीने से रख दी तो बोले ये तो वाकई कमाल भर दिया। सुंदर लग रहा।इसे कहते हैं संजोना😊😊😊 "ये कमाल खाली भी नहीं होगा पिताजी "....कह कर मैं भी हँस पड़ी। मैं ये लिखते हुए अब भी उतना ही मुस्कुरा रही जितना तब मुस्कुरा रही थी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें