कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2369

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कहने वाली बात है कि तुम घुलते नहीं . .

कहने वाली बात है कि तुम घुलते नहीं . . ... देखो धुँध के आगोश में पहाड़ तक घुल रहे। * आओ पास आकर बैठो और घुल जाओ....वाला नज़ारा अभी मेरी छत से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें