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पुराने वाले गुलाब

पुराने वाले गुलाब जब भी उसे देखती हूँ तो लगता है वो कब तक अपने पुराने प्रेम की पंखुड़ियों में कैद रहेगा । कब तक उसकी सूख गई महक से लप्रेक लिखता रहेगा। मैं हमेशा उससे कहती हूँ...गुलाब की सूखी पंखुड़ियों से याद तो बनती है पर बेइंतेहा वाला "वो फिर वही वाला दिल" कभी नहीं बनता। पर वो है ना ज़िद्दी .... बनाता जाता है अक्षरों से पुराने वाले गुलाब रिफ्रेश memories नहीं रिफ्रेश love होना चाहिए l काश ऐसा प्रेमी दूसरा न हो.... और अगर हो तो सबको मिले...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें