कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2361

भाषा / Language

कल्प वृक्ष से जरा ऊपर आमां का घर है। हमें आता देख वे घर से…

कल्प वृक्ष से जरा ऊपर आमां का घर है। हमें आता देख वे घर से बाहर आगयी फिर हाल चाल पता पूछा। मैंने कहा आप तो बहुत सुंदर हो...एक फ़ोटो ले लूँ? तो कहने लगी ईजा....आज तो मैंने बाल भी नहीं बनाए। कैसी लगूँगी? फिर हँस कर मान गयी।तयर गाल कत्तु भल छन ...(तेरे गाल कितने अच्छे हैं) मैंने उनके गाल छूकर कहा मैं जब बूढ़ी हो जाऊंगी तो आप के जैसे चमक रहे । आप जैसे लगूं। उन्होंने गले लगा लिया। 😊😊😊😊 तस्वीर पल भर के प्यार की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें