भाषा / Language
मैं तुम्हें अपने सारे तारे दे तो देती .....फिर मुझे अपनी रा…
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*मैं तुम्हें अपने सारे तारे दे तो देती .....फिर मुझे अपनी रात का ख़्याल आया।
मैंने खारिज़ कर दिया एक टुकड़ा प्रेम
*तुम्हारा इंतज़ार सूरज की पहली किरण की तरह करती हूँ....
रोज़ मुआ डूब जाता है उजाला
*क्या मांगेंगे ये तय नहीं करते....
तुम्हें और कितना पा सकेंगे.....ये हसरत लिख कर बाँध आते हैं।
मन्नत के पेड़ नहीं होते ....न धागे कलीरे
मन्नत के हम होते हैं... बँधे - बँधे
सुनो....
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कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें