भाषा / Language
उसका लिखा पढ़ो तो लगता है ... आईने से टकराकर
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उसका लिखा पढ़ो तो लगता है ... आईने से टकराकर
मेरा नाम echo हो रहा।
ये मेरी खुश फ़हमी भी हो सकती है ..पर शब्दों से हूबहू चेहरे का मिलान तुम्हारी न की जा सकने वाली हाँ से मिलता है।
मुझे ना में हाँ उकेरा हुआ क्यूँ लगता है?
क्या ये तुम्हारा तिलिस्म है?
मुझे सबसे छिपा रखने का...
तुम पहुँचते हो मुझ तक
वापस न लौटने के लिए।
मैं बाहें फैलाएं रहती हूँ सदा
एक रोज़ हवा में संग लिखेंगे अपने नाम का पहला अक्षर
मुझे यकीन है ध्वनि एक ही होगी।
शुभ रात...💐💐💐
मुझे उसे याद करने के लिए बस शुभ रात कहना होता है....
ढल जाता है वो।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें