भाषा / Language
चाँद
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चाँद ...
*इतरा लो.....
आज तुम्हारा "दिन" है चाँद
*चाँद भी अलग अलग क़िस्म के होते हैं.....
मेरा वाला थोड़ा खड़ूस है।
*ऐसे थम के न देखो चाँद ....
मैं वही रोज़ वाली कल्पना हूँ ।
*आज कितना भी तुम्हें छलनी से बाँध दूँ चाँद....
कल फिर तुम सबकी छत पर ही लटके नज़र आओगे।
ये दिखते दिखते गुल होने वालों को चाँद ही कहते हैं ना?
सुनो...
मेरे वाले का भी यही हाल है।
मेरी न पूछो...
*मुझे तो थाली, चम्मच ,कटोरी, कड़ाही, चकला ,तवा यहां तक कि आटे की लोई में भी चाँद नज़र आता है।
रसोई में मेरा इश्क़ गुपचुप चलता रहता है।
शुभ करवाचौथ ।
*व्रत रखा नहीं है पर चाँद को खूब छेड़ रही शाम भर से😊😊😊
मेरी झमक पिछली दीवाली की है ।
शुभ रात💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें