देर रात जब अपने पंख उतार देती हूँ ... बाक़ी बची मैं ... तुझमें पाखी होती हूँ। शुभ रात💐
रचना 227520 अक्टूबर 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishदेर रात जब अपने पंख उतार देती हूँ✦देर रात जब अपने पंख उतार देती हूँ ... बाक़ी बची मैं ... तुझमें पाखी होती हूँ। शुभ रात💐कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें