कल्पनाशब्दों के बीच
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स्त्री अक्सर अपना नाम लिखकर कहीं भूल जाती है..पर वही नाम मि…

स्त्री अक्सर अपना नाम लिखकर कहीं भूल जाती है..पर वही नाम मिटाना हमेशा याद रखती है। आपको गर कभी मिले ऐसा कोई नाम तो खूब सहेजें उसे ... और हाँ ...लौटाएँ जरूर। नामगुम ना रहे वो कभी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें