ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2265

भाषा / Language

कोई नहीं ऐसा

✦
कोई नहीं ऐसा ..... जो मेरी "गिरहें" पढ़ सका "तुम "भी नहीं सिर्फ वो ..... सिर्फ वो ..... जो गिरहें ..... लगने नहीं देती लगती है तो ..... टिकने नहीं देती बहा ले जाती है .....दूर कहीं उडा ले जाती है ....और कहीं लफ़्ज़ों में घोल कर अंतर्मन को खोल कर कौन ? अरे ! वो..... वो है ना ........"मेरी कल्पना" मेरी किताब पर ही नहीं आप मेरे मन में छप गयी हो...उस दिन से। Farha Uves ji आप memories में मिली💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें