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हम अपनी सहूलियत के लिए घर बदल लेते हैं

हम अपनी सहूलियत के लिए घर बदल लेते हैं.... पर घर हमें कभी नहीं बदलता। वो इंतज़ार में रहता है।घर जीत गया... वापस इंदिरापुरम जा रही अपने पुराने घर एक बार प्यार में पड़ जाओ तो बार बार लौटते हो। इस बार घर मेरे प्यार में पड़ गया। उसी की शिद्दत रही होगी कि वापस ले आया मुझे।आ रही हूँ ।बस कुछ दिन और😊😊😊😊 *तस्वीर memories में मिली😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें